प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS), गोरखपुर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। यह सफलता याचिकाकर्ता डॉ. चंद्रशेखर दुबे की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मो. समीउज्जमान खान* की दलीलों पर मिली है।
WRIA No. 15243 of 2026 – क्या है मामला?
कोर्ट नं. 6 में जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने इस मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता डॉ. चंद्रशेखर दुबे ने 2012 में कार्यवाहक प्रधानाचार्य के वेतन के लिए याचिका (WRIT-A 38870/2012) दायर की थी। हाई कोर्ट के 27.11.2019 के आदेश के बाद भी वेतन नहीं दिया गया, तो अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी, जिसके बाद 12.05.2026 को वेतन मिला।
अब पेंशन का मामला था। याचिकाकर्ता ने अंतिम आहरित वेतन (Last Drawn Salary) पर पेंशन मांगी, जिसका आधार सुप्रीम कोर्ट से पुष्ट (SLP 32854/2026) *वीरेश चंद्र मिश्रा केस (Special Appeal 209/2026)* है।
आरोप है कि DIOS गोरखपुर ने इस वैध दावे को बिना विचार खारिज कर दिया और दावा फॉरवर्ड करने वाले कार्यवाहक प्रिंसिपल को ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी दे दी।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने 29 सितंबर 2026 के आदेश में कहा – “प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट रूप से विधिक दुर्भावना (Legal Mala Fide) का मामला है, जब DIOS ने अपनी शक्ति का प्रयोग तिरछे मकसद से प्रिंसिपल को धमकाने और याचिकाकर्ता के दावे को कुचलने के लिए किया।”
कोर्ट ने DIOS गोरखपुर (प्रतिवादी नं. 4) को *6 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत हलफनामे* के साथ हाजिर होने को कहा है। उन्हें बताना होगा कि वीरेश चंद्र मिश्रा के फैसले के बावजूद पेंशन कैसे रोकी और प्रिंसिपल को नोटिस क्यों दिया। संतोषजनक जवाब न मिलने पर अवमानना का नोटिस जारी होगा।हाई कोर्ट में अधिवक्ता मो. समीउज्जमान खान की पैरवी से DIOS गोरखपुर को झटका, पेंशन मामले में व्यक्तिगत तलब*

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने DIOS, Gorakhpur के रवैये पर गंभीर आपत्ति जताई। पेंशन के दावे को खारिज करने और दावा भेजने वाले Principal को कार्रवाई की धमकी देने पर DIOS को 6 अक्टूबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया गया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर अवमानना की कार्रवाई हो सकती!



