प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ऊर्जा और पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर अब उत्तराखंड में साफ दिखने लगा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद राज्य के सरकारी महकमों ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण ने अपने ‘ग्रीन मिशन’ के तहत ‘तेल बचाओ मुहिम’ की शुरुआत कर दी है। इसका मकसद न सिर्फ गाड़ियों का इस्तेमाल कम करके ईंधन बचाना है, बल्कि दफ्तरों में बिजली के खर्च में भी कटौती करना है। सरकार ने साफ कर दिया है कि ऊर्जा बचत की शुरुआत प्रशासनिक स्तर से ही होगी, ताकि जनता में एक सकारात्मक संदेश जाए। इसके लिए राज्य कैबिनेट ने तय किया है कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिले में शामिल वाहनों की संख्या आधी की जाएगी। प्रदेश में हफ्ते में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ लागू होगा। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ की व्यवस्था भी अपनाई जाएगी। जिन अफसरों के पास एक से ज्यादा विभागों का प्रभार है, वे अब एक दिन में अधिकतम एक ही सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल कर सकेंगे। साथ ही सरकारी कर्मचारियों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया जाएगा।
CM के निर्देशों पर तुरंत अमल करते हुए MDDA के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने प्राधिकरण में एक विशेष कार्ययोजना लागू कर दी है। अधिकारियों और कर्मचारियों से दफ्तर आने-जाने के लिए ‘कार पूलिंग’ (साझा वाहन) अपनाने की अपील की गई है। जो कर्मचारी दफ्तर के आसपास ही रहते हैं, उन्हें पैदल या साइकिल से आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। संसाधनों के सही इस्तेमाल के तहत अफसरों के गैर-जरूरी विदेश दौरों से बचने पर भी जोर दिया गया है।
MDDA उपाध्यक्ष ने साफ किया कि दफ्तरों में बिजली की बर्बादी किसी हाल में नहीं होने दी जाएगी। मुख्यालय में सेंट्रलाइज्ड एसी और दूसरे एयर कंडीशनर के इस्तेमाल को सीमित कर दिया गया है। कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि जो लाइटें, कंप्यूटर या अन्य विद्युत उपकरण इस्तेमाल में न हों, उन्हें तुरंत बंद रखा जाए।
देहरादून लगातार बढ़ते ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में MDDA का मानना है कि सरकारी विभागों द्वारा साझा वाहनों और साइकिल के उपयोग को बढ़ावा देने से कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी और शहर के पर्यावरण को भी फायदा पहुंचेगा।
MDDA उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया कि, “छोटे-छोटे प्रयासों से न केवल ईंधन बचेगा, बल्कि सरकारी खर्च में भी कमी आएगी। यह सिर्फ सरकारी आदेश नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी है। अगर अफसर और कर्मचारी खुद पहल कर कार पूलिंग या साइकिल का इस्तेमाल करेंगे, तो पेट्रोल-डीजल की बचत के साथ पर्यावरण का भी संरक्षण होगा।”



