प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मुफ्त राशन पाने वाले लोगों की सूची में बड़ा बदलाव किया गया है। अलग-अलग राज्यों में 2.21 करोड़ ऐसे लोगों के नाम इस सूची से काट दिए गए हैं, जो मुफ्त राशन के असल हकदार नहीं थे। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मुफ्त राशन पाने वाले लोगों की सूची में बड़ा बदलाव किया गया है। अलग-अलग राज्यों में 2.21 करोड़ ऐसे लोगों के नाम इस सूची से काट दिए गए हैं, जो मुफ्त राशन के असल हकदार नहीं थे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मुफ्त अनाज का लाभ सिर्फ गरीब और जरूरतमंदों तक ही पहुंचे।
अपात्र लोगों की हुई पहचान
खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने गुरुवार को कहा कि यह कदम सही लोगों तक लाभ पहुंचाने के लिए उठाया गया है। उन्होंने इसके उदाहरण देते हुए बताया कि कई राशन कार्ड मृत हो चुके लोगों के नाम पर चल रहे थे या फिर ऐसे लोग मुफ्त राशन ले रहे थे जो इनकम टैक्स भरते हैं।
हालांकि, मंत्री ने यह भी साफ किया कि राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे अयोग्य लोगों के नाम हटाने के साथ-साथ योजना में पात्र और जरूरतमंद लोगों के नाम भी तुरंत जोड़ें। उन्होंने कहा, कुछ राज्यों ने अयोग्य लाभार्थियों को हटाने का काम पूरा कर लिया है, जबकि कुछ राज्य अभी भी ऐसे लोगों की पहचान कर रहे हैं।
सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि, सरकारी विभागों के अलग-अलग डेटा को मिलाने के बाद यह पाया गया कि वर्तमान में मुफ्त राशन ले रहे लगभग 10 प्रतिशत लोग राज्यों के नियमों के हिसाब से इसके हकदार नहीं हैं। इसके बाद राजस्थान, ओडिशा और मध्य प्रदेश जैसे कई राज्यों ने अयोग्य राशन कार्डों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कार मालिक और कंपनियों के निदेशक भी ले रहे थे मुफ्त राशन
जानकारों के मुताबिक, खाद्य मंत्रालय अभी एक व्यापक जांच अभियान चला रहा है। एक अधिकारी के अनुसार, जांच में पता चला है कि सबसे गरीब अंत्योदय अन्न योजना के तहत, जिसमें हर महीने 35 किलो अनाज मिलता है, कई ऐसे अकेले रहने वाले लोग इसका फायदा ले रहे थे जिनकी उम्र 18 साल से भी कम थी। इसके अलावा मुफ्त अनाज लेने वालों में कई टैक्स देने वाले लोग, कार के मालिक और कंपनियों के निदेशक (डायरेक्टर) भी शामिल पाए गए हैं। इतना ही नहीं, करीब 60 लाख से 1 करोड़ लोग ऐसे भी मिले जिन्होंने योजना के तहत कई महीनों से अपने हिस्से का राशन ही नहीं उठाया था।
नई तकनीक से राशन वितरण में आई पारदर्शिता
खाद्य मंत्री जोशी के अनुसार, राशन वितरण को डिजिटल बनाने का बड़ा फायदा हुआ है। अब योजना के तहत बांटे जाने वाले 98.5 प्रतिशत अनाज की पहचान लाभार्थियों के आधार नंबर और ई-पॉस मशीनों के जरिए की जा रही है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून 2013 के तहत, देश के 81.3 करोड़ (813 मिलियन) लोगों को हर महीने 5 किलो मुफ्त अनाज मिल सकता है। लेकिन राशन कार्डों से अपात्र लोगों के नाम कटने के बाद, फिलहाल 79.2 करोड़ लोग ही इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक देश भर में कुल राशन कार्डों की संख्या 19 करोड़ से अधिक है।



