प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूरिया की कालाबाजारी के आरोप में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत एक साल के लिए बंद किए गए 4 लोगों की बंदी को अवैध करार देते हुए रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने माना कि कालाबाजारी के मामले में विशेष कानून PBMSEC Act मौजूद है तो सामान्य कानून NSA नहीं लगाया जा सकता।
यह महत्वपूर्ण आदेश कोर्ट नं. 42 में जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता मो. समीउज्जमान खान, असिस्टेड बाई सद्दाम खान, अशरा और सज्जाद खान की दलीलों पर दिया है।
क्या था पूरा मामला? – Habeas Corpus Writ No. 954/2026
मामला लीड केस मोहम्मद हारून बनाम भारत संघ व 5 अन्य (HABC No. 954 of 2026) के साथ 3 अन्य याचिकाएं – रामेंद्र सिंह उर्फ गुड्डू (1306/2026), यश राघव (1075/2026) और हरेंद्र प्रताप सिंह (1077/2026) का है।
पुलिस के मुताबिक 10 मई 2026 को अनूपशहर, थाना गंगा ब्रिज के पास चेकिंग में IFFCO की 525-525 बोरियों से लदे तीन ट्रक (UP-63-T-8665, UP13-T-9565, UP38-T-2352) पकड़े गए थे। ड्राइवरों के पास कोई बिल-वाउचर नहीं था और बताया कि माल PCF बफर गोदाम नई मंडी बुलंदशहर से लोड हुआ है और मोहम्मद हारून का है। मौके पर ही स्विफ्ट कार UP14-FR-7227 में जा रहे मोहम्मद हारून को भी हिरासत में लिया गया। केस क्राइम नं. 206/2026 थाना अनूपशहर में दर्ज हुआ।
इसके बाद जिलाधिकारी बुलंदशहर ने 23.05.2026, 29.05.2026 और 12.07.2026 को चारों के खिलाफ NSA के तहत एक साल की निरुद्धि का आदेश पारित कर दिया।
एडवोकेट समीउज्जमान खान की दलील –
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मो. समीउज्जमान खान ने बहस की कि NSA की धारा 3(2) के Explanation में साफ लिखा है कि “आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में बाधा” वाला कृत्य इसमें शामिल नहीं है और जिस ग्राउंड पर PBMSEC Act में निरुद्धि हो सकती है, उस पर NSA में आदेश नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि कालाबाजारी रोकने के लिए PBMSEC Act 1980 एक स्पेशल एक्ट है और NSA जनरल एक्ट है – *Generalia Specialibus Non Derogant* यानी जनरल कानून स्पेशल कानून को ओवरराइड नहीं कर सकता। PBMSEC में अधिकतम 6 महीने की हिरासत है, जबकि NSA में 1 साल, इसलिए सिर्फ सजा बढ़ाने के लिए NSA का दुरुपयोग कानून का मजाक है।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के Suraj Pal Sahu Vs State of Maharashtra (1986) केस का हवाला दिया।
कोर्ट ने क्या कहा –
कोर्ट ने कहा कि Suraj Pal Sahu वाला केस रेलवे ट्रैक का सामान चोरी का था जिससे रेल सेवा बाधित होती, वो कालाबाजारी नहीं थी। जबकि यह मामला सीधे तौर पर यूरिया को ज्यादा दाम पर खुले बाजार में बेचने के लिए कालाबाजारी का है। इसमें फिजिकल ब्लॉकेड या सड़क तोड़ना जैसा कुछ नहीं है।
इसलिए NSA का इस्तेमाल एक परवर्टेड और तोड़ी-मरोड़ी गई कार्रवाई है।
आदेश –
इसी आधार पर कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2026 को सभी चारों याचिकाएं स्वीकार करते हुए जिलाधिकारी बुलंदशहर के NSA आदेशों को निरस्त कर दिया और आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं को यदि किसी अन्य मामले में वांछित न हो तो तत्काल रिहा किया जाए।



